ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत भारतीय संविधान का विकास (Indian Constitution development under EIC)
Hello Readers! 😊 आप यहाँ भारत के ‘ ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत भारतीय संविधान का विकास (Indian Constitution development under EIC PYQ’s) ‘ से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों का अध्ययन करेंगे। यहाँ दिए गए प्रश्न UPPSC, UPSSSC एवं अन्य एग्जामिनिंग बॉडीज द्वारा आयोजित विगत वर्षों की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से लिए गए हैं।
Table of Contents
Regulating Act-1773
- तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉर्ड नॉर्थ द्वारा गठित गुप्त समिति की सिफारिश पर 1773 में पारित।
- प्रमुख उद्देश्य – ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को ब्रिटिश क्रॉउन के नियंत्रण में लाना।
- 1773 के विनियमन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान:
- इस अधिनियम द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन हेतु, पहली बार एक लिखित संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
- इस अधिनियम के माध्यम से ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार पर रोक तथा भारतीय लोगों से उपहार लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
- बंगाल के गवर्नर को ‘ Governor General of Bengal ‘ का नाम दिया गया तथा प्रशासन में उसकी सहायता के लिए 14 सदस्य कार्यकारी परिषद का गठन किया गया।
- इस अधिनियम के माध्यम से वारेन हेस्टिंग बंगाल का पहला गवर्नर जनरल बना।
- कंपनी के कार्यों पर नियंत्रण के लिए इंग्लैंड में 2 संस्थाएं अस्तित्व में थी–
- Court of Directors (निदेशक मंडल)
- Court of Proprietors (स्वत्वधारी मंडल)
- इस अधिनियम द्वारा ब्रिटिश क्रॉउन का निदेशक मंडल के माध्यम से कंपनी पर नियंत्रण सशक्त हो गया। कंपनी के लिए भारत में अपने राजस्व, नागरिक और सैन्य मामलों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देना आवश्यक कर दिया गया।
- इस अधिनियम के माध्यम से भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी गई। मद्रास और मुंबई के गवर्नर को बंगाल प्रेसिडेंसी के अधीन किया गया।
- इस अधिनियम के तहत 1774 में कोलकाता में एक ‘सुप्रीम कोर्ट’ की स्थापना की गई जिसके प्रथम Chief Justice एलिजा इंपे थे तथा अन्य 3 जज हाइड, चैंबर्स और लिमेस्टर थे।
Act of Settlement-1781
- Act of Settlement-1781 को लार्ड कॉर्नवालिस (Lord Cornwallis) ने 1781 में ब्रिटिश भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में लागू किया था।
- प्रमुख उद्देश्य – इस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद और सुप्रीम कोर्ट के बीच अधिकारों का सीमांकन किया गया।
- Act of Settlement-1781 के प्रमुख प्रावधान –
- इस अधिनियम द्वारा बंगाल प्रेसिडेंसी को बिहार और उड़ीसा के लिए भी विधि निर्माण की शक्ति प्रदान की गई।
- इस अधिनियम के अंतर्गत कंपनी के अधिकारी शासकीय रूप से किए गए अपने कार्यों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गए।

Pitts India Act-1784
- इस अधिनियम की योजना ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट द्वारा प्रस्तुत की गई।
- प्रमुख उद्देश्य – EIC पर ब्रिटिश संसद का नियंत्रण बढ़ाना, पूर्ण रूपेण नियंत्रण स्थापित करना।
- प्रमुख प्रावधान – इस अधिनियम के अंतर्गत भारत में कंपनी द्वारा शासित क्षेत्र को पहली बार ब्रिटिश अधिपत्य क्षेत्र कहा गया।
Amendment Act of-1786
- इस अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट ने लॉर्ड कॉर्नावालिस को बंगाल का गवर्नर जनरल बनाया तथा गवर्नर जनरल को प्रधान सेनापति की शक्तियां भी मिली।
- इस अधिनियम के माध्यम से Governor General को यह अधिकार मिल गया कि वह अपने काउंसिल के निर्णय को रद्द कर अपना निर्णय लागू कर सकता है।
Charter act–1793 / Lord Cornwallis act–1793
- उद्देश्य: कंपनी की कार्यशैली एवं कार्यकारी संगठन में सुधार करना।
- प्रमुख प्रावधान –
- बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से देने का प्रावधान किया गया।
- सभी कानूनों व नियमों की व्याख्या का अधिकार न्यायालय को प्रदान किया गया।
Charter act–1813
- चार्टर एक्ट–1813 के प्रमुख प्रावधान –
- इस अधिनियम के माध्यम से EIC के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त करके कुछ प्रतिबंधों के साथ सभी अंग्रेजों को भारत में व्यापार करने की छूट मिल गई, किंतु चाय और चाइना के साथ व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार बना रहा।
- कोलकाता, मुंबई और मद्रास की सरकारों द्वारा बनाए गए विधियों का ब्रिटिश संसद द्वारा अनुमोदन किया जाना अनिवार्य कर दिया गया।
- इस अधिनियम के माध्यम से भारत में पहली बार शिक्षा के विकास के लिए ₹100000 वार्षिक का बजट निर्धारित किया गया।
- इस अधिनियम के माध्यम से क्रिश्चियन मिशनरीज को भारत आकर धर्म प्रचार करने और भारत में बसने की अनुमति मिल गई।
Charter Act-1833
- इस एक्ट के माध्यम से गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल को गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया बनाया गया तथा लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
- गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया में कानून बनाने की शक्ति, राजनीतिक, नागरिक और सैन्य शक्तियां निहित थी।
- चाय और चाइना के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को खत्म कर दिया गया। कंपनी की व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया तथा कंपनी अब विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निकाय बन गई।
- ब्रिटेन के नागरिक अब बिना किसी रोक-टोक के भारत आ सकते थे और खेत भी खरीद सकते थे। साथ ही कृषि और बागवानी करने का भी अधिकार मिला।
- विधिक परामर्श हेतु प्रथम विधि आयोग–1834 का गठन किया गया। गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में विधि सदस्य के रूप में चौथे सदस्य लार्ड मैकाले (प्रथम विधि अध्यक्ष) को शामिल किया गया। यद्यपि कि उसे केवल परिषद की बैठकों में भाग लेने और परामर्श देने का अधिकार था, परंतु मतदान का अधिकार नहीं था।
- कंपनी में किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए सभी भारतीयों से समानता के आधार पर व्यवहार की बात की गई, बिना किसी भेदभाव के धर्म, जाति, रंग और वंश के आधार पर नहीं।
- इस अधिनियम द्वारा 1843 में नियम–५ द्वारा दास प्रथा का अंत किया गया।
Charter act–1853
- गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में पहली बार विधायिका (नियम-कानून बनाना) एवं कार्यपालिका (प्रशासनिक कार्य) को अलग किया गया।
- इसी अधिनियम के तहत 6 सदस्यीय ‘केंद्रीय विधान परिषद’ का सृजन किया गया, जिससे गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद (विधान परिषद) में अब कुल सदस्यों की संख्या बढ़कर 12 ( विधि निर्माण हेतु भारत में पहली बार एक 12 सदस्यीय क्रियाशील विधान परिषद का सृजन किया गया) हो गई।
- ‘केंद्रीय विधान परिषद’ के सृजन के माध्यम से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया। केंद्रीय विधान परिषद के सदस्य संपूर्ण ब्रिटिश भारत से चुने जाते थे, जिसमें बंगाल के चीफ जस्टिस, कोलकाता उच्च न्यायालय से एक न्यायाधीश एवं शेष चार सदस्यों का चुनाव बंगाल, मद्रास, मुंबई और आगरा की स्थानीय सरकारों द्वारा द्वारा किया जाता था।
- इस अधिनियम के माध्यम से विधि सदस्य को पूर्ण सदस्य का दर्जा प्रदान किया गया।
- ब्रिटेन स्थित निदेशक मंडल (Court of Directors) में सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई।
- प्रमुख सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के लिए नामजदगी के सिद्धांत को समाप्त कर, प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर नियुक्ति का प्रावधान किया गया।
- सिविल सेवाओं में पहली बार भारतीयों को शामिल करने का प्रावधान किया गया।
- इस अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश संसद को यह अधिकार प्राप्त हो गया कि वह किसी भी समय ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत का शासन अपनी इच्छा अनुसार ब्रिटिश संसद के नियंत्रण में ले सकती है।
Indian Constitution development under EIC Important Questions-PYQs
Q.1: निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई ?
[UPPCS-1997]
[A] चार्टर एक्ट – 1833
[B] भारतीय परिषद् अधिनियम – 1861
[C] भारतीय परिषद् अधिनियम – 1892
[D] भारतीय परिषद् अधिनियम – 1909
[B] भारतीय परिषद् अधिनियम – 1861
Q.2: Q_6. भारत के गवर्नर जनरल को किस एक्ट के द्वारा अपनी समिति के निर्णयों को अस्वीकार करने का अधिकार मिला ?
[UPPCS-1990]
[A] 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
[B] 1784 का पिट इंडिया एक्ट
[C] 1786 का एमेंडमेंट एक्ट
[D] 1813 का चार्टर एक्ट
[C] 1786 का एमेंडमेंट एक्ट
Q.3: निम्नलिखित में से किस अधिनियम में कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया गया था? [UPPSC-2010]
[A] रेगुलेटिंग एक्ट 1773
[B] पिट का भारत अधिनियम 1784
[C] चार्टर एक्ट 1813
[D] अमेरिका
[A] रेगुलेटिंग एक्ट 1773
Q.4: सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के संबंध में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा की गई थी।
2. लैमेस्टर इस न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
[A] केवल 1
[B] केवल 2
[C] दोनों 1 और 2
[D] न तो 1 और न ही 2
[A] केवल 1
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